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ना विचार, ना विमर्श, बस हैं तो लुभावने वादे

ना विचार, ना विमर्श, बस हैं तो लुभावने वादे 



दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्राी अरविंद केजरीवाल एक के बाद एक एलान कर दिल्लीवासियों को अपनी ओर आकर्षित करते जा रहे हैं। ऐसे में मालूम होता है कि मुख्यमंत्राी साहब इन मुद्दों की बुनियाद टटोले बिना ही वादे किए जा रहे हैं। अब उनके 20 किलोलीटर मुफ्रत पानी के वायदे पर ही गौर पफरमा लिजिए। 1 करोड़ 20 लाख की जनसंख्या वाली राजधनी में मात्रा 19 लाख ही पानी के कनेक्शन है और उनमें से भी केवल 9 लाख ही मीटर कनेक्शन्। ऐसे में ये लोकलुभावन तोहपफा है किसके लिए? पूरी दिल्ली के वोट बटोरने के बाद पानी की सौगात केवल 9 लाख घरों को ही, ये कैसी खानापुर्ति हुई। मुख्यमंत्राी को सुर्खियां बनाने की इतनी जल्दी थी कि उन्होनें आनन-पफानन में पफैसला तो ले लिया लेकिन यह भी न सोचा कि द्वारका व वसंत कुंज जैसे हाउसिंग सोसाइटियों में पानी कैसे  पहुंचेगा? जहंा पाइप लाइन है ही नहीं वहां पानी कैसे पहुंचाया जाएगा? ऐसे में मुख्यमंत्राी ने दिल्ली के कोने-कोने में पानी पहुंचाने वाले मददगार टैंकर वाले सहयोगियों को भी टैंकर मापिफया बता उखाड़ पेंफकने की बात कह डाली है। यदि मुख्यमंत्राी जी ने ऐसा कर दिया तो कितने घर प्यासे रह जाएंगें, कितने बच्चे पानी के लिये बिलखने लगेंगे। दिल्ली में पानी के लिए जनता त्राहीमाम-त्राहीमाम चिल्लाने लगेगी। इस तोहपेफ से किसी को पफायदा भले ही न हुआ हो लेकिन सरकार पर 165 करोड़ का खर्च जरूर आ गया। एक बात तो माननी पड़ेगी कि राजधनी के मुख्यमंत्राी बातें बनाने में कापफी माहिर हैं।
तभी तो पानी देने के वादे को कैसे तोड़-मरोड़ कर भोली-भाली जनता के सामने रख कापफी सुर्खियां बना ली। नीतियां बनाने में अपरिपक्व हमारे मुख्यमंत्राी ने हाल ही में भ्रष्टाचार की शिकायत करने हेतु जनता को हेल्पलाइन नम्बर उपलब्ध् करवा कुछ समझदारी दिखाई। परंतु यह कैसे हो सकता है कि केरजरीवाल साहब बिना हंगामा किए मान जाए। उन्होंने उस हेल्पलाइन नम्बर पर स्टिंग करने की प्रव्रिफया बताने की बात भी कह डाली। इसके बाद तो खुपिफया कैमरों की बिव्रफी में जो उछाल आया वह शायद ही कभी आया होगा।  खुपिफया कैमरे जो मंझे हुए पत्राकारों के हथियार हुआ करते थे वो अब आम जनता के हाथ में पहुंच गए। इसमें बुरा क्या है कि अब जनता अपने ही घरों में स्टिंग करेगी, कोई किसी के घर, कमरे या बाथरूम में इन्हे उपयोग करेगा। घर में समान हो तो कहीं न कहीं तो उपयोग में आता ही है अब चाहे किसी की गोपनियता भंग करने में या लोगांे को आपस में लड़वाने के। लोग इसका उपयोग कर एक दूसरे को ब्लैकमेल करने में भी पीछे नहीं हटेंगें। साथ ही में विचार प्रकट करने की आजादी के दायरे भी सुकड़ने लगंेगें। इस लुभावने हथियार के आपने पास आ जाने से जनता कुछ समय बाद खुद ही व्याकुल हो जाएगी। यह कदम उठा केजरिवाल ने पहले से भ्रष्ट व रिश्वतखोर अध्किारियों को और सतर्क कर दिया। अब वो बोलकर नहीं अपितु दूसरे तरीखों से घूसखोरी करेंगें। मुख्यमंत्राी के इस पफैसले से कोई बड़ा घूसखोर पफंसे या नहीं, परंतु समाज में अराजकता अवश्य पफैलेगी। पहले पत्राकारों के कैमरे में कैद हो जाने वाले भ्रष्ट नेता अब इन स्टिंग में नहीं पफंसने वाले हैं। दिल्ली के समझदार मुख्यमंत्राी ने इसके परिणाम पर चर्चा किए बिना ही इसे मैदान में उतार दिया। राजधनी के मुख्यमंत्राी सुर्खियों के इतने दीवाने हैं कि, सुखर््िायों से हटने लगते हैं तो बौखलाकर, बिना विचार-विमर्श किए कोई भी असंतुलित योजना या उपलब्ध् िघोषित कर देते हैं। वैसे विचार करने वाली बात यह है कि चुनावों से पहले भ्रष्टाचार के खिलापफ सबूतों के होने कि बात करने वाले मुख्यमंत्राी को अब सबूतों के लिए जनता का सहारा लेना पड़ रहा है। परंतु कोई बात नहीं आप के इन आपतिजनक व खोखले वादों को मीडिया सजा कर पेश करेगी। आप बिना विचार-विमर्श किए ऐसे ही लोक लुभावन पफैसले लेते रहिए। बस देश की जनता का एक निवेदन है, यदि मुख्यमंत्राी को सुर्खियां बटोरने से पुफर्सत मिले तो एक बार अपने पफैसले पर गौर पफरमाइएगा। आप को देश की जनता ने अंादोलन व विद्रोह से पैदा किया है। यदि आप ऐसे ही अपने स्वार्थ पूर्ति में लगे रहे तो आने वाली पीढ़ी का आंदोलन, रैली, विद्रोह व आम व्यक्ति जैसे शब्दों से भरोसा उठ जाएगा।    


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