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अंधियारी रात और रोशनी...


शादी हुए एक साल से ज्यादा हो गया है.. लेकिन आज भी न जानें क्यों विकास को कहीं न कहीं लगता है कि कभी न कभी तो रोशनी लौट आएगी… लौटा आएगी विकास के पास शायद अपने वादों को निभाने या फिर उसे मासूम प्यार के लिए जो न रिश्ते समझते थे और न ही परिस्थिति, समझते थे तो केवल प्यार…

रोशनी की शादी हो जाने के बाद भी विकास आगे न बढ़ पाया था लेकिन इस बात का एहसास ही उसे करीब दो साल बाद हुआ. रोशनी ने जब फोन पर कहा कि किसी और के साथ उसका रिश्ता तय हो गया तो विकास ने ठान लिया कि अब न वह रोशनी को फोन करेगा और नहीं रोशनी की निजी जिंदगी में दखल देगा… मन में ऐसा ठन विकास ने करीब सालभर रोशनी से बात करने की कोशिश तक न की...

रोशनी की शादी हो जाने के बाद कही महीनों तक वह खुद को समझाता रहा कि रोशनी नहीं तो कोई और कभी न कभी अपने हाथ में दिया लिए उसकी अंधियारी जिंदगी में आएगी… लेकिन उसे कहां पता था कि वह अब तक रोशनी से आगे बढ़ ही नहीं पाया था… वह अब भी वहीं खड़ा था.. खड़ा था उस रोशनी के इंतजार में जिससे उनसे बुढ़ापा साथ बितानी का वादा लिया था… उस रोशनी के इंतजार में जिसके जिस्म से नहीं बल्कि उसके होने भर से उसकी जिंदगी रंगीन थी… उस रोशनी के इंतजार में जो शादी की रात तक भाग जाने के लिए विकास को कहती रही… शायद कभी अंधियारी रात लंबी जो जाती हो लेकिन हर अंधइयारी रात के बाद एक चम-चमाता सूरज जरूर निकलता है… 

शायद इसी सूरज के इंतजार में आज भी विकास आगे न बढ़ पाया… कोशिश बहुत की, लोगों से मुलाकात की, बात की लेकिन अंधेरा न मिटा… शायद इसलिए कहते हैं जिंदगी कोरा कागज है… एक बार जो लिखा गया वह मिटता नहीं है और फिर इस अंधियाारी रात को तो बस रोशनी की तलाश है… 

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